कर्मचारियों एवं मजदूरों की मांगों का समाधान नही तो भाजपा को चुनाव में भारी नाराजगी का सामना करना पड़ेगा :- सुभाष लांबा महासचिव
March 14th, 2019 | Post by :- | 60 Views

मुकेश वशिष्ट/हसनपुर पलवल:- सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि जन सेवाओं के निजीकरण से किसानों, गरीबों व मजदूरों की परेशानियां बढ़ेंगी। उन्होंने आम जनता, किसानों व गरीबों से बेहतर जनसेवा, बेहतर रोजगार और निजीकरण, ठेका प्रथा,व फूटपरस्ती के खिलाफ संयुक्त आन्दोलन  करने का आह्वान किया। उन्होंने यह आह्वान ब्रहामण धर्मशाला में आयोजित नागरिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए किया। जिसकी अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान दरियाव सिंह,, सीटू के जिला प्रधान श्रीपाल सिंह भाटी, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्म चंद, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान सिंधू सिंह, संयुक्त तौर पर की। सम्मेलन में पलवल विधानसभा क्षेत्र के आम नागरिकों, किसानों, मजदूरों व कर्मचारियों के सैंकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान रमेश चन्द्र के जिला  द्वारा संचालित इस नागरिक सम्मेलन में किसानों, मजदूरों व कर्मचारियों के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। महासचिव सुभाष लांबा ने दो टूक कहा कि अगर सरकार ने कर्मचारियों एवं मजदूरों की उत्पीड़न एवं दमन की कार्यवाहियों को समाप्त कर मांगों का समाधान नही किया तो भाजपा को चुनाव में उनकी भारी नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। सम्मेलन में जननायक जनता पार्टी के जिला प्रधान उदयवीर सिंह भड़ाना व आम आदमी पार्टी के जिला संयोजक कुलदीप कौशिक ने अपनी पार्टी की और से कर्मचारियों, मजदूरों व किसानों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया और सरकार की ध्रुवीकरण करने की नीति के खिलाफ जोरदार आंदोलन चलाने पर जोर दिया।

नागरिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान रमेश चन्द्र, सचिव  बनवारी लाल,  सीटू के जिला सचिव भागीरथ बैनिवाल, रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के उपाध्यक्ष तारा चंद ने सरकार पर 2014 में भाजपा द्वारा किए घोषणा पत्र में वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा की पिछले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर प्रत्येक साल 2 करोड़ रोजगार दिए जाएंगे। ऐसा ही हरियाणा में भी भाजपा ने 2 लाख नयी नौकरियां देने की बात कही थी। लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ। इसके विपरित केवल नोटबंदी में ही करीब एक करोड़ लोगों का रोजगार खत्म हो गया। बिजली, शिक्षा, रोड़वेज, स्वास्थ्य,जन स्वास्थ्य आदि लगभग सभी विभागों में  बड़े-बड़े पूंजीपतियों व ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निजी हाथों में दिया जा रहा है। कर्मचारियों एवं मजदूरों की ठेका प्रथा समाप्त करने, पंजाब के समान वेतनमान व पेंशन देने, विधानसभा में रेगुलराइजेशन बिल पारित कर कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने, बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए खाली पड़े लाखों पदों को भरने आदि मांगों की अनदेखी की गई है। उत्पीड़न एवं दमन की कार्यवाहियों से आंदोलनों को दबाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खेती संकट में है और किसान आत्महत्याएं कर रहे है। लेकिन सरकार झुठे दावें कर जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।

राष्ट्रवाद के नाम पर अब  सरकार  सभी मुद्दों को गोल करना चाहती है। जिसका डटकर विरोध किया जाएगा। नागरिक सम्मेलन में कर्मचारियों, मजदूरों व किसानों के प्रतिनिधि सोहन लाल चौहान, सुभाष शर्मा, रुपराम तेवतिया, जितेन्द्र तेवतिया, योगेश शर्मा, ब्लाक समिति सदस्य राज कुमार, पूर्व सरपंच तीर्थ देसवाल, राकेश तंवर आदि उपस्थित थे।