सरकार का निजी ट्रक ऑपरेटरों के साथ दोहरा रवैया
April 15th, 2019 | Post by :- | 114 Views

अजय शर्मा(इंदौरा)

सरकार की अपनी गाड़िया 20-25 पुराने ट्रक भी चलते हैं

निजी ट्रक ओपरेटर को सिर्फ 10,12 या 15 साल तक परमिट

सरकार यहाँ जनता के भले के लिए बनी है वह जनता के साथ दोहरा रवैया करती है यह बात कुछ ट्रांस्पोटर के साथ बातचीत में सामने आई जब पत्रकार ने किसी ट्रक के मालिक से पूछा कि आप का ट्रक की मुनियाद कितने वर्ष की है तो उसने बताया कि सरकार दिल्ली के लिए 10,हिमाचल में 12 साल व नेशनल परमिट 15 साल तक ही हमें ट्रक चलाने देती है उसके बाद हमें यह ट्रक चलाने की अनुमति नहीं है।

अब सवाल यह उठता है कि सरकार ऐसा क्यों करती है क्या यह गलत नहीं कि जो शख्स 35 लाख रुपये की लागत से ट्रक खरीदेगा और हर साल उसका टैक्स भरेगा और भी कई प्रकार के ख़र्चे हैं तो क्या वह 35 लाख रुपये 10,12,15 सालों में पूरा कर लेगा शायद नहीं क्योंकि हर साल इंश्योरेंस, नेशनल टैक्स,स्टेट एंट्री,डीजल,गाड़ी लेने पर उसका कर्जा ओर उसपर व्याज भी कई खर्चे जो कि सामने नहीं आते जो कि ट्रांस्पोटर के लिए नुकसानदेह है, लेकिन सरकार इसकी तरफ ध्यान नहीं देती।

सरकार की कैसी है दोहरी नीति

अब सवाल यह उठता है कि सरकार की दोहरी नीति क्या है या दोहरा रवैया कैसा है इसके सवूत हम सब के सामने है जिसे हम रोजमर्रा की ज़िंदगी मे सामने देखते हैं लेकिन कभी उस बारे में ध्यान नहीं देते और वो है सरकार के ऑफिस में चल रहीं उनकी अपनी गाड़िया,आप ने लोक निर्माण विभाग,जल विभाग ओर भी कई विभाग हैं जिनकी गाड़िया जर्जर स्तिथि में लेकिन सरकार उनको बन्द न करके इन निजी वाहन चालकों को तंग करती है या उन्हें ऐसा करने पर दण्डित करती है जो कि एक प्रकार का दोहरा मापदंड है जिसे की यह ट्रांस्पोटर लाखों रुपये लगा कर ख़ौफ़ ओर सहमी हुई ज़िंदगी व्यतीत कर रहे हैं क्या यह हिंदुस्तान में रहने वाले ट्रक ऑपरेटरों के लिए गलत ओर बुरा व्यवहार नहीं है सरकारों द्वारा,अगर ऐसा ही चलता रहा तो कौन कल को ट्रांस्पोटर बनेगा और कौन मालढुलाई का काम करेगा अगर सरकार ने सही नीति न बनाई तो यह एक दिन आफत बन कर समस्या सामने आएगी।

क्या कहते हैं डमटाल ट्रक यूनियन के प्रधान मस्तराम

मस्तराम ने कहा कि आज जो स्तिथि ट्रक ट्रांस्पोटर की हो गयी है उसमें सरकार की दोहरी नीति है जिसमें दिल्ली में 10 साल का परमिट मिलता है जो कि एक बहुत बड़ा व्यपार का केंद्र है यहाँ हम 10 साल पुरानी गाड़ी नहीं लेकर जा सकते ,हिमाचल प्रदेश में 12 साल का परमिट मिलता है जबकि नेशनल परमिट 15 साल का है,उन्होंने सरकार से गुजारिश की है कि है कि हमें हिमाचल में भी 15 साल का परमिट करदे ताकि हमें कुछ निजात तो मिल सके उन्होंने सरकार पर दोहरा व्यवहार करने का भी आरोप लगाया कि सरकारी कार्यालयों में तो गाड़िया काफी पुरानी भी है उन्हें कैसे यह परमिट दे देते हैं लेकिन हम निजी ट्रांस्पोटर को यह सिर्फ 10,12 और 15 साल का सिर्फ परमिट देते हैं।

हीरा सिंह भूतपूर्व( डमटाल ट्रक यूनियन प्रधान)ने कहा कि सरकारें देश की रक्षा के लिए तो 60 साल पुराना मिग चलाती है जबकि हम ट्रक चालक सिर्फ 10,12,या 15 साल तक ही परमिट ले सकतें है क्या हम इस देश के नागरिक नहीं है हम तो एक तरह की कम्पनी की नोकरी कर रहे हैं क्योंकि 35 लाख का ट्रक का ऋण लो फिर उसपर व्याज फिर परमिट फीस, रोड टैक्स,स्टेट टैक्स,टोल प्लाजा फिर ड्राइवर की सैलरी, सर्विस,ओर मेंटिनेंस खर्चा आदि हम ट्रांस्पोटर को बचता ही क्या है और इसके बाद हमारे 15 साल हो जाते हैं गाड़ी खत्म सरकार के आदेशानुसार,अब हम क्या करेंगे इस के लिए सरकार को सोचना चाहिए।

कर्ण सिंह गुलेरिया ट्रांस्पोटर ने कहा कि सरकार का दोहरा रवैया है क्योंकि सरकारी जो गाड़िया हैं उनमें से कई गाड़िया 20 से 25 साल पुरानी है और वो चल रही हैं लेकिन हम ट्रांस्पोटर को परमिट सिर्फ 15 साल तक चाहे गाड़ी घर मे खड़ी रहे उसको परमिट आगे नहीँ मिलेगा उन्होंने कहा कि अगर हमारी गाड़िया जो कि ट्रक हैं उनको 10,12,या15 साल तक परमिट मिलेगा तो सरकार की पुरानी गाड़िया भी बंद होनी चाहिए।

रीता धीमान विधायिका इन्दौरा विधानसभा क्षेत्र ने कहा कि मुझे इस बारे में इतना पता नहीं है और अभी आंचार सहिता भी लगी हुई है आंचार सहिता के बाद अगर ट्रक चालकों को परमिट के कारण कोई समस्या है तो उनकी इस समस्या को माननीय मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर के समक्ष रखा जाएगा और इस समस्या का समाधान करवाया जाएगा।